Saturday, 17 December 2016

ज़िन्दगी

कौन हूँ मैं ? अजनबी बन
मेरी तलाश ना कर
मुझे ढूंढने में यूँ तू
वक़्त जाया ना कर

मैं.. . . . . .
बदसूरत भी हूँ और ख़ूबसूरत भी
ख़ामोश भी हूँ और आवाज़ भी
चोट भी हूँ और मरहम भी
थकन भी हूँ और आराम भी

विपरीत हूँ तो पर्याय भी
भयभीत हूँ तो निर्भय भी
चंचल हूँ तो ठहराव भी
धुप हूँ तो छाँव भी

मैं.. . . . . .
श्वेत भी हूँ और श्याम भी
इंद्रधनुषी भी हूँ और बदरंग भी
नाज़ुक भी हूँ और कठोर भी
मासूम भी हूँ और क्रूर भी

भवर हूँ तो साहिल भी
परिश्रम हूँ तो फल भी
तप हूँ तो मन्नत भी
पतझड़ हूँ तो बसंत भी

पहचानो मुझे मेरे दोस्त
ये सब मेरे ही रंग रूप है
ठुकराओ ना यूँ मुझे
तुम्हे मेरी जरुरत है

मिलने आई हूँ मैं तुमसे
थोड़ा वक़्त तुम भी निकाल लो
थोड़ा मुस्कुरा लो थोड़ा गुदगुदा लो
कुछ सपने फिर सजा लो
मुझे मेरे नाम से फिर पुकार लो

मैं हूँ ज़िन्दगी !

                                              -- प्रियाशी


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